मई 02, 2011

हम चाहते थे व्यवस्था बदले

हम चाहते थे व्यवस्था बदले 
क्योंकि व्यस्था जरा हो चली थी भ्रष्ट 
व्यवस्था बदली हो गई महा भ्रष्ट 
हमने फिर चाह व्यवस्था बदले 
व्यवस्था बदली हो गई महानतम भ्रष्ट 
हमने एक बार फिर चाह व्यवस्था बदले 
व्यवस्था फिर बदली ,हो गई महा महानतम भ्रष्ट 
अब हम में से कोई नहीं चाहता है की व्यवस्था बदले 
क्योंकि पूरा युग ही हो चला है व्यवस्था के समान्तर भ्रष्ट 
आशा 

15 टिप्‍पणियां:

Khare A ने कहा…

ek dam sahi baat kahi Aapne Assha ji!

prabhat ने कहा…

Criticism -
Sorry Asha ji,
In these lines there are no Asha(hope) as expected.

ab aap hi batayen ki aage ka rasta kaise tay ho ?

Asha Pandey Ojha ने कहा…

Prabhat ji sach to yahee hai alochna samalochna ka aapko poorn hak hai .. parntu aaj vyvstha poorntaya bhrsht hai ... yah nirasha nahee yah sach hai ... ashawadee hono ka matlab yah nahee ki hum sach na bolen

sukhdev rai ने कहा…

hmmmm....har bar koshish ki lekin halaat bad se badter hote gaye.....ab yeh to bharatvarash ka durbhagya hi ban gaya........asha

vijay ने कहा…

hum ek bar aur kosis karenge
sundar panktiyan hai

Devilal Bhadu ने कहा…

pura system hi change karna padega

munna jee ने कहा…

aapne bilkul sahi farmaya , aasha jee ..........aapko shukriya........

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

aasha ji jo halat hain un par achha vaar kiya hai.......

Bhagat Singh Panthi ने कहा…

plz visit your blog listed here ; http://blogrecording.blogspot.com/

दिनेश पारीक ने कहा…

बहुत बढ़िया लिखा है आपने! और शानदार प्रस्तुती!
मैं आपके ब्लॉग पे देरी से आने की वजह से माफ़ी चाहूँगा मैं वैष्णोदेवी और सालासर हनुमान के दर्शन को गया हुआ था और आप से मैं आशा करता हु की आप मेरे ब्लॉग पे आके मुझे आपने विचारो से अवगत करवाएंगे और मेरे ब्लॉग के मेम्बर बनकर मुझे अनुग्रहित करे
आपको एवं आपके परिवार को क्रवाचोथ की हार्दिक शुभकामनायें!
http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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Sabir Mohammad ने कहा…

क्या खूब मेडम क्या खूब वाकई आपकी व्यवस्था को मानना पड़ेगा !

रोली पाठक ने कहा…

आशा दी... बहुत ही अच्छी व् सच्ची अभिव्यक्ति |
सटीक बात कही आपने ...सार्थक रचना..

Brijesh Singh ने कहा…

सत्य बात है। इस सत्य को लाने के लिए आपका आभार!
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Rs Diwraya ने कहा…

परिवर्तन ही प्रकृति का नियम हैँ। आप मेरे ब्लॉग पर पधार कर हमेँ रास्ता दिखाये
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