फ़रवरी 04, 2010

कुछ हाइकु

सादा सौन्दर्य
अपवाद स्वरूप
नज़र आता

निर्माण -कार्य
रिश्तों से कमजोर
ढहते जाते

प्राण ले लेती
पुलिस हिरासत
बेगुनाह के

पूर्ण तुझी में
आंकाक्षा ईश्वर की
मैंने कर ली

लरजते से
तेरे मधुर बोल
ज्यौं लोकगीत

अबोले -क्षण
सच्ची प्रीत -प्यार के
शाश्वत क्षण

दिल में मेरे
रेगिस्तानी अंधड़
तेरी याद का

तेरे आदर्श
हैं पीढ़ियों के प्राण
ओ प्यारे बापू !

मत कुरेद !
भरे हुए ज़ख्मों को
पीड़ा दायक

1 टिप्पणी:

altafhusainjouhary ने कहा…

bahut badhiya....