फ़रवरी 03, 2010

अंधी हो गई

मूल्य लालटेन का
नहीं जुटा पाई
जब वह
बेचती गई
खुद को
रोशनी की खातिर
अंधी हो गई
मेरी पुस्तक "वक्त की शाख पे "से

1 टिप्पणी:

Asha Pandey Ojha ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.