फ़रवरी 05, 2010

किससें करूँ

दौरे-खिज़ां में चमन के बात किससें करूँ
पथरों के शहर में मन की बात किससें करूँ
इक हाथ दूसरे के ख़िलाफ़ खंज़र उठाये हुए
ऐसे में चेनो -अमन की बात किससें करूँ
हैं अपने ही घरों में साज़िशों के शिकार हम
वहां हिफ़ाज़ते -वतन की बात किससें करूँ
है शौक दोनों ही तरफ़ गड़े मुर्दे उखाड़ना
वहां नफ़रतों के दफ़न की बात किससें करूँ

1 टिप्पणी:

dutta ने कहा…

बहुत अच्छी रचना है छोटी