फ़रवरी 05, 2010

तुझे नमस्कार हो जाए

सुख शांती मंगल से परिपूर्ण ये संसार हो जाये

हर एक मन साँस में मानवता का संचार हो जाये

मिटा दो ये युद्ध विध्वंस तो बड़ा उपकार हो जाये

इस धरती से ख़त्म सरहदों की दीवार हो जाये

मिट जाये ये जांत-पांत दुनिया एक परिवार हो जाये

सचमुच ज़न्नत कहीं है तो ज़मी पे साकार हो जाये

काश !यक ब यक ऐसा कोई चमत्कार हो जाये

तो यक़ीनन खुद ब खुद तुझे नमस्कार हो जाए

मेरी पुस्तक "एक कोशिश रोशनी की ओर "से

1 टिप्पणी:

jitendra ने कहा…

sundar vichar