मार्च 14, 2010

अनुराग


हवा मिस- झुक -लुक -लुक -छुप

डार-डार से करे अंखियां चार

कस्तूरी हुई गुलाब की साँसें

केवड़ा,पलाश करे श्रृंगार

छूते ही गिर जाये पात लजीले

इठलाती-मदमाती सी बयार

सुन केकि-पिक की कुहूक-हूक

बौरे रसाल घिर आये कचनार

अम्बर पट से छाये पयोधर

सुमनों पर मधुकर गुंजार

कुंजर,कुरंग,मराल मस्ती में

मनोहर,मनभावन संसार

यमुना- तीरे माधव बंशी

फिर राधे-राधे करे पुकार

नख-शिख सज चली राधे-रमणी

भर मन-अनुराग अपरम्पार


मेरी पुस्तक "एक कोशिश रोशनी की ओर "से

1 टिप्पणी:

kishor kumar khorendra ने कहा…

मनोहर,मनभावन संसार


यमुना- तीरे माधव बंशी


फिर राधे-राधे करे पुकार

shbdo ka sundar pryog
man ko moh lene vaali rachna